Information For Seeds
सहजन (मोरिंगा) खेती मार्गदर्शिका
Sai Siddhivinayak Moringa Farming Guide
🌱 सहजन की खेती : मिट्टी और जलवायु
सहजन (ड्रमस्टिक/मोरिंगा शेवगा/ मुनगा )सभी प्रकार की मिट्टी और जलवायु में अच्छी तरह उगाया जा सकता है।
हल्की, मध्यम से गहरी काली मिट्टी इसके लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
🌾 अंकुरण (Germination)
अंकुरण बढ़ाने के लिए बीजों को रातभर पानी में भिगोया जाता है।
इसके बाद बीजों पर पैकेट में दी गई दवा का उपचार किया जाता है।
बीज उपचार के लाभ:
तेज अंकुरण
अधिक अंकुरण प्रतिशत
खराब मौसम में भी पौधों की अच्छी वृद्धि
महत्वपूर्ण जानकारी:
1 किलो बीज पैकेट में लगभग 3000 से 3400 बीज होते हैं। और 500 ग्राम के पैकेट मे 1500 से 1700 बीज होते है
उपचारित बीजों को छाया में सुखाकर प्लास्टिक बैग में रखा जाता है।
इस प्रक्रिया से 15-20 दिनों में लगभग 80% अंकुरण प्राप्त होता है।
🌿 बीज मात्रा
प्रति एकड़ लगभग 650 बीजों की आवश्यकता होती है।
लगभग 650 पौधे प्रति एकड़ पर्याप्त माने जाते हैं।
⭐ सहजन की खेती का महत्व
सहजन एक तेजी से बढ़ने वाली एवं बहुउपयोगी फसल है।
इसकी विशेषताएं:
पौधों की छाया अन्य फसलों की वृद्धि में बाधा नहीं डालती।
कम पानी और कम मजदूरों में सफल खेती संभव।
अधिक भूमि वाले किसानों के लिए लाभदायक फसल।
खेत की बेड पर Sai Siddhivinayak Moringa लगाने से अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है।
🌳 किस्में (Varieties)
Sai Siddhivinayak Moringa
चयन प्रक्रिया के बाद विकसित की गई यह किस्म:
स्वादिष्ट होती है
पूरे वर्ष अधिक उत्पादन देती है
अच्छी गुणवत्ता वाली लंबी फलियां देती है
🪴 पौध तैयार करना
प्लास्टिक बैग का आकार:
4ʺ x 6ʺ
बैग में छेद:
नीचे से 1 इंच
ऊपर से ½ इंच
इन छेदों से अतिरिक्त पानी आसानी से निकल जाता है।
पौध तैयार करने की प्रक्रिया:
मिट्टी में 5-10 ग्राम जैविक या सेंद्रीय खाद मिलाएं।
उपचारित बीजों को ½ सेमी गहराई पर आड़ा बोएं।
हल्की मिट्टी से ढकें।
आवश्यकता अनुसार रोज पानी दें।
📏 पौधों की दूरी
गड्ढों का आकार:
1ʹ x 1ʹ x 1ʹ
खाद:
प्रत्येक गड्ढे में 100 ग्राम सेंद्रीय खाद डालना लाभदायक है।
दूरी:
यदि बाग 6-10 वर्षों तक रखना हो तो 8ʹ x 10ʹ दूरी रखें।
मिट्टी के अनुसार दूरी 6ʹ से 10ʹ तक रखी जा सकती है।
💧 सिंचाई (Irrigation)
सहजन तेजी से बढ़ने वाला पौधा है, इसलिए नियमित सिंचाई आवश्यक है।
गर्मियों में:
हर 4 दिन पर सिंचाई करें।
फलियां बनने के समय हर 3 दिन पर पानी दें।
बारिश और सर्दियों में:
8/10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें।
ड्रिप सिंचाई:
2 लीटर प्रति घंटा डिस्चार्ज
12-16 लीटर पानी
6-8 घंटे
हर 4 दिन पर
ध्यान दें:
मिट्टी की नमी, वातावरण की आर्द्रता और पौधों की अवस्था के अनुसार पानी दें।
⚠️ अधिक पानी देने के नुकसान:
फूल कम आते हैं
पौधा केवल हरी बढ़वार करता है
उत्पादन प्रभावित हो सकता है
🌿 खाद एवं उर्वरक
प्रत्येक महीने प्रति पौधा 100-200 ग्राम सेंद्रीय खाद दें।
रासायनिक उर्वरकों उपयोग करे ।
🐛 रोग एवं कीट नियंत्रण
सामान्यतः सहजन पर रोग एवं कीट कम लगते हैं।
फल मक्खी नियंत्रण:
आवश्यकता अनुसार रासायनिक या बायोलॉजिकल दवा का उपयोग करें।
अधिक प्रकोप होने पर:
Chlorpyriphos 10-15 मि.ली.
या Imida 8 से 10 मी. ली.
10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
पत्ती खाने वाली इल्ली:
जून-जुलाई में कोमल पत्तियां नुकसान पहुंचाती है।
Chlorpyriphos या केमिकल अथवा बायोलॉजिकल दवा प्रभावी रहती है।
नियमित दवा छिड़काव के लाभ:
फसल रोगमुक्त रहती है
कीट नियंत्रण होता है
गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त होता है
✂️ सहजन की उचित छंटाई
जब पौधे 1.5 -3 फीट ऊंचे हो जाएं:
सभी तरफ निकलने वाली कोमल शाखाओं की छंटाई करें।
ऊपर की मुख्य शाखा (Apical Shoot) भी काटें।
नियमित छंटाई के लाभ:
हर 21 दिन मे ब्रांच की टॉपिंग करे इस से जल्दी फूल आते हैं
जल्दी फलियां लगती हैं
प्रत्येक गांठ से 6- 7फूलदार शाखाएं निकलती हैं
जब फूलों वाली शाखाएं स्पष्ट दिखाई देने लगें, तब छंटाई बंद कर दें।
🌼 फूल एवं फलियां
फूल आने के 1-2 महीने बाद गुच्छों में फलियां लगती हैं।
लंबी एवं गुणवत्तापूर्ण फलियों के लिए नियमित सिंचाई आवश्यक है।
📦 उत्पादन (Yield)
पहली तुड़ाई:
रोपाई के 7-8 महीनों बाद
दूसरी फसल:
पूरी तुड़ाई के बाद हल्की छंटाई करें
पौधे में दोबारा फूल आना शुरू होता है
अगले 2-3 महीनों में दूसरी फसल तैयार हो जाती है
🌟 क्यों चुनें Sai Siddhivinayak Moringa?
✅ अधिक उत्पादन
✅ लंबी एवं स्वादिष्ट फलियां
✅ कम पानी में बेहतर परिणाम
✅ कम रखरखाव वाली फसल
✅ पूरे वर्ष उत्पादन क्षमता
✅ किसानों के लिए लाभदायक खेती विकल्प